Kaavyansh

  नेता जी की खोज
वोटर ने कहा-''झूठ का है बोलबाला यहाँ
कोई भी नेता न मिला सच्चाई के घर में
गाँधी जी की नीतियों की बात जो भी करते थे
वो भी मुझे मिले नहीं गाँधी की डगर में''
मैंने कहा-मेढ़कों की टर्र-टर्र में मिलेंगे
या तुझे मिलेंगे किसी खटर-पटर में
ढक्कन उठा के मेनहोल का तू झाँक लेना
दलबदलू मिलेंगे तैरते गटर में
   
 
  चमचे के गुण
कोई न था आस-पास, नेता जी भी थे उदास
चोरी-छिपे नेता जी की दुम हुआ चमचा
नेता जी के वन्दन में, हर अभिनन्दन में
उनके माथे का कुमकुम हुआ चमचा
नेता जी हँसे तो मुआँ तालियाँ बजाने लगा
दुखी होने पर गुमसुम हुआ चमचा
नेता जी की सभा में जो जूतों की बौछार हुई
गदहे के सींग जैसा गुम हुआ चमचा